Bihar Board 16 March Class 11th Political Science Viral Question paper 2026

Bihar Board 16 March Class 11th Political Science Viral Question paper 2026

बिहार बोर्ड कक्षा 11वी का जो पेपर 16 मार्च के दिन राजनीतिशास्त्र का द्वितीय पाली में होने जा रहा है उसके लिए नीचे कुछ महत्वपूर्ण गेस प्रश्न के साथ वायरल प्रश्नपत्र भी अपलोड कराया गया है इसे जरूर पढ़ के परीक्षा देने जाएं ताकि आपका अच्छा मार्क्स आ सके।

NAME OF BOARD
BSEB 11th ANNUAL EXAM 2026
NAME OF PAPER POLITICAL SCIENCE
EXAM DATE 16 MARCH 2026
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कक्षा 11वी कितने सिलेबस से प्रश्न रहेंगे Annual Exam 2026 Syllabus

कक्षा 11th वार्षिक परीक्षा 2026 का प्रश्न पत्र आपके विद्यालय में मार्च माह तक पढ़ाए गए पाठ से प्रश्न आएगा

  • बिहार बोर्ड कक्षा 11वी वार्षिक परीक्षा 2026 मुख्य विवरण :-
  • परीक्षा बोर्ड :- बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB)
  • कक्षा 11वी वार्षिक परीक्षा / सैद्धांतिक परीक्षा
  • परीक्षा का तिथि :- 16.3.2026 से 24.3.2026
  • परीक्षा का तरीका :- ऑफलाइन (पेन और पेपर मोड)
  • विषय :- Political Science, Geography, Philosophy, English, Hindi, Urdu, Psychology, Economics, Sociology, History, Music, Home Science 
  • परीक्षा शिफ्ट :- आमतौर पर दो शिफ्ट (सुबह 09:30 to 12:30 और दोपहर 02:00 तो 05:00) में होती है।

परीक्षा की तैयारी का मच्छतपूर्ण जानकारी (TIPS FOR PREPARATION) :-

  • NCERT पुस्तकों का अध्ययन :- NCERT BOOK और बिहार बोर्ड की पाठ्यपुस्तको को प्रतिदिन पढ़ें
  • मॉडल पेपर प्रश्न पत्र :- पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों और मॉडल पेपर को जरूर पढ़ें।
  • समय का ध्यान :- रिवीजन के लिए अंत में समय बचाएं
  • रिजल्ट का तनाव से बचे :- परीक्षा के बाद संबंधित स्कूलों द्वारा रिजल्ट जारी किया जाएगा।

इस परीक्षा में फेल करने पर क्या होगा ?

क्योंकि यह विद्यालय के स्तर पर आयोजित होने वाली वार्षिक परीक्षा है। इसलिए इस परीक्षा में भाग लेना अनिवार्य है। अन्यथा आपको फाइनल बोर्ड परीक्षा 2027 में शामिल नहीं किया जाएगा।

 वार्षिक परीक्षा Exam 2026-EXAM CENTER

इस परीक्षा का आयोजन आपके विद्यालय के स्तर पर होगा। अर्थात की जिस भी विद्यालय में आपका नामांकन है। उसी में जाकर आपको परीक्षा देना पड़ेगा ।

क्या वार्षिक परीक्षा के कॉपी Check होता हैं?

जी हां, जब आपकी परीक्षा सम्पन्न हो जाती हैं, तब आपके कॉपी को आपके विद्यालय/कॉलेज के शिक्षकों के द्वारा चेक की जाती हैं। तथा इसका फाइनल रिजल्ट बोर्ड ऑफिस को भेजा भी जाता हैं।

वार्षिक परीक्षा का महत्व क्या है।

यदि आप भी वार्षिक परीक्षा देने जा रहे हैं या देने वाले हैं तो आप सभी को इस परीक्षा में भाग लेना अति आवश्यक है वार्षिक परीक्षा का उद्देश्य छात्रों की आगे की कक्षा में प्रवेश करने से पहले उसकी तैयारी को जांच किया जाए और तैयारी को बेहतर किया जाए ताकि वह आगे परीक्षा में किसी भी प्रकार में उनको दिक्कत ना हो और उनको जो भी कमजोरी है वह उसको सुधार सके इसलिए वार्षिक परीक्षा लिया जाता है।

वार्षिक परीक्षा 2026 का महत्व जानें 

कक्षा 11वी की वार्षिक परीक्षा 2026 में देने जा रहे है या देने वाले हैं तो आप सभी को इस परीक्षा में भाग लेना। अति आवश्यक है वार्षिक परीक्षा का उद्देश्य छात्रों की आगे की कक्षा में प्रवेश करने से पहले उसकी तैयारी को जांच किया जाए और तैयारी को बेहतर किया जाए ताकि वह आगे परीक्षा में किसी भी प्रकार में उनको दिक्कत ना हो और उनको जो भी कमजोरी है। वह उसको सुधार सके इसलिए वार्षिक परीक्षा लिया जाता है। वार्षिक परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाला छात्रों को आगे की परीक्षा परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद अस्त में विश्वास बढ़ता है।

Bihar Board Class 11th Political Science Objective Answer key 2026

अगर आप 16 मार्च के दिन राजनीतिशास्त्र का पेपर देने जा रहे हैं तो नीचे Objective का answer key दिया जा रहा है उसे देखने बाद परीक्षा हॉल में जाएं।

1.C 11.B 21.C 31.C 41.D
2.C 12.D 22.C 32.C 42.C
3.A 13.C 23.A 33.B 43.B
4.B 14.B 24.A 34.B 44.B
5.A 15. 25.B 35.B 45.D
6.A 16. 26.D 36.A 46.C
7.C 17. 27.D 37.B 47.A
8.B 18. 28.C 38.C 48.B
9.B 19. 29.C 39.C 49.A
10.B 20.C 30.B 40.D 50.C
51. 61. 71. 81. 91.
52. 62. 72. 82. 92.
53. 63. 73. 83. 93.
54. 64. 74. 84. 94.
55. 65. 75. 85. 95.
56. 66. 76. 86. 96.
57. 67. 77. 87. 97.
58. 68. 78. 88. 98.
59. 69. 79. 89. 99.
60. 70. 80. 90. 100.

Bihar Board Class 11th Political Science Subjective Answer key 2026

अगर आप 16 मार्च के दिन राजनीतिशास्त्र का पेपर देने जा रहे हैं तो नीचे Subjective का answer key दिया जा रहा है उसे देखने बाद परीक्षा हॉल में जाएं।

 

Subjective Answer

 

निष्कर्ष – इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपको बताया कि कैसे आप बिहार बोर्ड कक्षा 11वी के सभी विषय का असली प्रश्नपत्र डाउनलोड कर सकते है।

 

 

कुछ महत्वपूर्ण गेस प्रश्न

1. उत्तर-व्यवहारवादी क्रान्ति क्या है ?

उत्तर – उत्तर-व्यवहारवादी क्रांति राजनीति विज्ञान में एक ऐसा आंदोलन था जिसमें केवल तथ्यों और आंकड़ों के अध्ययन के बजाय सामाजिक समस्याओं और मूल्यों को भी महत्व दिया गया। इसका उद्देश्य राजनीति विज्ञान को समाज की वास्तविक समस्याओं से जोड़ना था।

2. तुलनात्मक पद्धति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।

उत्तर – तुलनात्मक पद्धति में विभिन्न देशों की राजनीतिक संस्थाओं और व्यवस्थाओं की तुलना की जाती है। इससे उनके समानताओं और भिन्नताओं को समझने में सहायता मिलती है और राजनीतिक प्रणालियों के कार्य-प्रणाली का बेहतर ज्ञान प्राप्त होता है।

2. तुलनात्मक पद्धति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
  • उत्तर – इसमें मुख्य रूप से राज्य और सरकार का अध्ययन किया जाता है।
  • यह अधिकतर ऐतिहासिक और दार्शनिक दृष्टिकोण पर आधारित होता है।
4. डेविड इस्टन के राजनीति व्यवस्था सिद्धान्त से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर – राजनीति वैज्ञानिक के अनुसार राजनीतिक व्यवस्था वह प्रणाली है जिसके माध्यम से समाज में अधिकारपूर्वक निर्णय लिए जाते हैं और संसाधनों का वितरण किया जाता है।

5. राजनीति विज्ञान के अध्ययन की ऐतिहासिक पद्धति का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।

उत्तर – इस पद्धति में राजनीतिक संस्थाओं और विचारों को उनके ऐतिहासिक विकास के आधार पर समझा जाता है। इसके द्वारा यह जाना जाता है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्थाएँ अतीत की घटनाओं और प्रक्रियाओं से कैसे विकसित हुई हैं।

6. राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र के संबंध पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें ।

उत्तर – राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र दोनों ही समाज के अध्ययन से संबंधित हैं। समाजशास्त्र सामाजिक संरचना और संबंधों का अध्ययन करता है, जबकि राजनीति विज्ञान सत्ता और शासन का अध्ययन करता है। इसलिए दोनों विषय एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

7. राष्ट्र के अनिवार्य तत्वों का संक्षिप्त वर्णन करें ।

उत्तर – किसी भी राज्य के चार मुख्य तत्व होते हैं :-

  • जनसंख्या
  • निश्चित भू-भाग
  • सरकार
  • संप्रभुता

इन चारों के बिना राज्य की कल्पना नहीं की जा सकती।

8. राज्य और संगठन में क्या अंतर है ?

उत्तर – राज्य एक सर्वोच्च राजनीतिक संस्था है जिसके पास संप्रभु शक्ति होती है। जबकि संगठन किसी विशेष उद्देश्य के लिए बनाए गए समूह होते हैं और उनके पास राज्य जैसी सर्वोच्च शक्ति नहीं होती।

9. राष्ट्र की उत्पत्ति के दैविक सिद्धांत की दो विशेषताएँ लिखें ।

उतर – इस सिद्धांत के अनुसार राज्य की उत्पत्ति ईश्वर की इच्छा से हुई है। राजा को ईश्वर का प्रतिनिधि माना जाता है और उसकी आज्ञा का पालन करना आवश्यक समझा जाता है।

10. आन्तरिक प्रभुसत्ता पर एक टिप्पणी लिखें ।

उत्तर – आंतरिक प्रभुसत्ता का अर्थ है कि राज्य की सीमाओं के भीतर सर्वोच्च शक्ति राज्य के पास होती है। राज्य के आदेशों का पालन सभी नागरिकों और संस्थाओं को करना पड़ता है।

11. लोकप्रिय सम्प्रभुत्ता से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर – लोकप्रिय प्रभुसत्ता का अर्थ है कि राज्य की सर्वोच्च शक्ति जनता में निहित होती है। जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करके सरकार बनाती है और शासन की शक्ति अंततः जनता से ही प्राप्त होती है।

12. बहुलवाद के विकास के कारकों की विवेचना करें ।

उत्तर – बहुलवाद के विकास के मुख्य कारणों में लोकतंत्र का विस्तार, विभिन्न सामाजिक समूहों का उदय और नागरिक स्वतंत्रताओं की वृद्धि शामिल हैं। इससे समाज में अनेक विचारों और हितों को महत्व मिलने लगा।

13. लास्की के बहुलवाद सिद्धांत का मूल्यांकन करें ।

उत्तर – राजनीति वैज्ञानिक Harold J. Laski के अनुसार समाज में केवल राज्य ही सर्वोच्च संस्था नहीं है। विभिन्न सामाजिक संगठन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बहुलवाद सिद्धांत राज्य की शक्ति को सीमित करने और समाज में लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने पर जोर देता है।

14. राष्ट्रीय स्वतन्त्रता का क्या अर्थ है ?

उत्तर – राष्ट्रीय स्वतंत्रता का अर्थ है कि कोई भी राष्ट्र बाहरी नियंत्रण या शासन से मुक्त होकर स्वयं अपने राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक निर्णय ले सके। इसमें देश की संप्रभुता और आत्मनिर्णय का अधिकार शामिल होता है।

15. आर्थिक स्वतन्त्रता पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखें ।

उत्तर – आर्थिक स्वतंत्रता का मतलब है कि व्यक्ति को अपनी आजीविका कमाने, व्यवसाय चुनने और संपत्ति रखने की स्वतंत्रता हो। इसके साथ यह भी आवश्यक है कि सभी लोगों को समान आर्थिक अवसर प्राप्त हों।

16. बेन्थम व मिल के उपयोगितावाद से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर – दार्शनिक Jeremy Bentham और John Stuart Mill के अनुसार किसी कार्य की अच्छाई या बुराई का निर्णय इस आधार पर किया जाना चाहिए कि वह अधिकतम लोगों के लिए कितना सुख या लाभ उत्पन्न करता है। इसे उपयोगितावाद कहा जाता है।

17. स्वतन्त्रता का मार्क्सवादी दृष्टिकोण क्या है ?

उत्तर – Karl Marx के अनुसार वास्तविक स्वतंत्रता तभी संभव है जब समाज में आर्थिक शोषण समाप्त हो। जब सभी लोगों को समान आर्थिक अवसर मिलेंगे और वर्ग भेद समाप्त होगा, तभी सच्ची स्वतंत्रता स्थापित होगी।

18. सामाजिक समानता का वर्णन करें ।

उत्तर – सामाजिक समानता का अर्थ है कि समाज में सभी व्यक्तियों को जाति, धर्म, लिंग या वर्ग के आधार पर भेदभाव के बिना समान सम्मान और अवसर मिलें। यह लोकतांत्रिक समाज की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।

19. समानता के आर्थिक पहलू पर विचार करें।

उत्तर – आर्थिक समानता का अर्थ है कि समाज में धन और संसाधनों का वितरण न्यायपूर्ण हो। सभी लोगों को शिक्षा, रोजगार और आर्थिक अवसर प्राप्त हों ताकि कोई व्यक्ति अत्यधिक गरीबी या असमानता का शिकार न हो।

20. जॉन राल्स के न्याय के सिद्धांत की व्याख्या करें ।

उत्तर – दार्शनिक John Rawls ने न्याय को समानता के आधार पर समझाया। उनके अनुसार समाज में सभी को समान स्वतंत्रता मिलनी चाहिए और सामाजिक व आर्थिक असमानताएँ तभी उचित हैं जब वे सबसे कमजोर वर्ग के हित में हों।

21. समानता और न्याय में क्या सम्बन्ध है ?

उत्तर – समानता और न्याय एक-दूसरे से जुड़े हुए सिद्धांत हैं। न्याय का उद्देश्य समाज में निष्पक्षता स्थापित करना है, जबकि समानता यह सुनिश्चित करती है कि सभी व्यक्तियों को समान अधिकार और अवसर मिलें।

22. अधिकार के आवश्यक लक्षण क्या हैं ?

उत्तर – अधिकार वे सुविधाएँ हैं जो व्यक्ति के विकास के लिए आवश्यक होती हैं। इनके प्रमुख लक्षण हैं :- समाज द्वारा मान्यता प्राप्त होना, कानून द्वारा संरक्षण मिलना और सभी नागरिकों के लिए समान रूप से लागू होना।

23. अधिकारों के वैधानिक सिद्धांत की विवेचना करें ।

उत्तर – वैधानिक सिद्धांत के अनुसार अधिकार राज्य और कानून द्वारा दिए जाते हैं। जब किसी अधिकार को कानून द्वारा मान्यता मिलती है, तभी वह प्रभावी और सुरक्षित माना जाता है।

24. कानूनी अधिकार से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर – कानूनी अधिकार वे अधिकार होते हैं जिन्हें राज्य के कानून द्वारा मान्यता और संरक्षण प्राप्त होता है। यदि इन अधिकारों का उल्लंघन होता है तो व्यक्ति न्यायालय की सहायता ले सकता है।

25. नैतिक और कानूनी अधिकार में क्या अन्तर है ?

उत्तर – नैतिक अधिकार समाज के नैतिक मूल्यों और आदर्शों पर आधारित होते हैं, जबकि कानूनी अधिकार राज्य के कानून द्वारा निर्धारित और संरक्षित होते हैं। कानूनी अधिकारों का उल्लंघन होने पर दंड का प्रावधान होता है।

26. अधिकार और कर्तव्य में क्या संबंध है ?

उत्तर – अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं। जहाँ व्यक्ति को अधिकार प्राप्त होते हैं, वहीं समाज और राज्य के प्रति कुछ कर्तव्य भी निभाने पड़ते हैं। दोनों के संतुलन से समाज में व्यवस्था बनी रहती है।

27. कानून की परिभाषा दें ।

उत्तर – कानून वह नियमों का समूह है जिसे राज्य द्वारा बनाया और लागू किया जाता है। इन नियमों का पालन सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य होता है और उल्लंघन करने पर दंड दिया जाता है।

28. कानून के विभिन्न स्रोतों की विवेचना करें

उत्तर – कानून के प्रमुख स्रोत हैं :- परंपराएँ, न्यायालय के निर्णय, विधायिका द्वारा बनाए गए अधिनियम और सामाजिक प्रथाएँ। इन सभी के आधार पर किसी देश की कानूनी व्यवस्था विकसित होती है।

29. मानवाधिकार की प्रासंगिकता क्या है ?

उत्तर – मानवाधिकार प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, स्वतंत्रता और सुरक्षा प्रदान करते हैं। आधुनिक लोकतांत्रिक समाज में मानवाधिकारों का संरक्षण आवश्यक है ताकि सभी लोग समान और सम्मानजनक जीवन जी सकें।

30. राष्ट्र राज्य का क्या अर्थ है

उत्तर – राष्ट्र-राज्य वह राजनीतिक व्यवस्था है जिसमें एक राष्ट्र अपनी निश्चित सीमा के भीतर संगठित होकर स्वतंत्र राज्य के रूप में शासन करता है। इसमें राष्ट्रीय एकता, संप्रभुता और साझा पहचान महत्वपूर्ण होती है।

31. राजनीति विज्ञान की परम्परागत और आधुनिक प्रकृति की विवेचना करें ।

उत्तर – राजनीति विज्ञान की परम्परागत प्रकृति मुख्य रूप से राज्य, सरकार, कानून और संस्थाओं के अध्ययन पर आधारित थी। इस दृष्टिकोण में राजनीतिक सिद्धांत, दार्शनिक विचार और ऐतिहासिक घटनाओं को अधिक महत्व दिया जाता था।

आधुनिक राजनीति विज्ञान का विकास 20वीं सदी में हुआ। इसमें केवल राज्य ही नहीं बल्कि मानव व्यवहार, राजनीतिक प्रक्रियाएँ, समूह, दबाव समूह और मतदान व्यवहार का भी अध्ययन किया जाता है। आधुनिक दृष्टिकोण अधिक वैज्ञानिक और व्यावहारिक माना जाता है।

32. राजनीति विज्ञान के अध्ययन की कौन-सी प्रमुख पद्धतियाँ हैं ? उनका आलोचनात्मक मूल्यांकन करें ।

उत्तर – राजनीति विज्ञान के अध्ययन की प्रमुख पद्धतियाँ इस प्रकार हैं :- 

  • ऐतिहासिक पद्धति
  • तुलनात्मक पद्धति
  • व्यवहारवादी पद्धति
  • दार्शनिक पद्धति

ऐतिहासिक पद्धति से राजनीतिक संस्थाओं के विकास को समझा जाता है। तुलनात्मक पद्धति में विभिन्न देशों की व्यवस्थाओं की तुलना की जाती है। व्यवहारवादी पद्धति में मानव व्यवहार और राजनीतिक गतिविधियों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।

इन पद्धतियों की सहायता से राजनीति को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है, लेकिन कभी-कभी ये सभी पहलुओं को पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर पातीं।

33. राष्ट्र को परिभाषित करें। राष्ट्र के अनिवार्य तत्वों का वर्णन करें।

उत्तर – राष्ट्र ऐसे लोगों का समूह होता है जिनमें भाषा, संस्कृति, इतिहास और परम्पराओं के आधार पर एकता और सामूहिक पहचान होती है।

राष्ट्र के प्रमुख तत्व हैं—

  • साझा संस्कृति और इतिहास
  • समान भाषा या परम्परा
  • एकता की भावना
  • निश्चित भौगोलिक क्षेत्र
  • राजनीतिक संगठन

इन तत्वों के आधार पर राष्ट्र की पहचान और एकता मजबूत होती है।

34. राष्ट्र की उत्पत्ति के विकासवादी सिद्धांत की विवेचना करें ।

उत्तर – विकासवादी सिद्धांत के अनुसार राष्ट्र का निर्माण किसी एक घटना से नहीं बल्कि लंबे ऐतिहासिक विकास के परिणामस्वरूप होता है। समाज, संस्कृति, भाषा और आर्थिक परिस्थितियों के धीरे-धीरे विकास से राष्ट्र का निर्माण होता है।

यह सिद्धांत बताता है कि राष्ट्र की उत्पत्ति एक प्राकृतिक और क्रमिक प्रक्रिया है जिसमें विभिन्न सामाजिक और ऐतिहासिक कारक योगदान देते हैं।

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