Bihar Board Class 10th Social Science VVI Subjective Question 2027

Bihar Board Class 10th Social Science VVI Subjective Question 2027

नमस्ते दोस्तों, अगर आप Bihar Board Class 10th Board Exam 2027 की तैयारी कर रहे हैं और Social Science के महत्वपूर्ण Subjective Questions खोज रहे हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए काफी उपयोगी है। इस पोस्ट में History, Geography, Political Science और Economics से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों की तैयारी के बारे में जानकारी दी गई है।

Name of Board 
Bihar Board 
Subject 
Social Science 
Class 
10th
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Class 10th Social Science VVI Subjective Question 2027

1. मेजिनी कौन था?

उत्तरः इटली के एकीकरण में मेजिनी का महत्वपूर्ण योगदान था। मेजिनी साहित्यकार, गणतांत्रिक विचारों का समर्थक और योग्य सेनापति था। उसमें आदर्श गुण अधिक और व्यावहारिक गुण कम थे।

2. मेटरनिख युग क्या था?

उत्तर: 1815 ई० से 1848 ई० तक के काल को इतिहासकारों ने ‘मेटरनिख युग’ कहा है क्योंकि इस अवधि में यूरोपीय राजनीति पर मेटरनिख की छाया हुई थी। अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व, वाक्पटुता एवं कूटनीति चातुर्य के कारण वह यूरोप के प्रमुख राजनीतिज्ञों में एक बन सका।

3. 1848 ई० फ्रांसीसी क्रांति के क्या कारण थे?

उत्तरः लुई फिलिप एक उदारवादी शासक था किन्तु बहुत ही महत्वाकांक्षी था। उसने अपने विरोधियों को खुश करने हेतु स्वर्णिम मध्यमवर्गीय नीति का अवलम्बन करते हुए 1840 ई० में गिजो को प्रधानमंत्री नियुक्त किया। गिजो कट्टर प्रतिक्रियावादी व्यक्ति था जो किसी भी प्रकार के वैधानिक, सामाजिक एवं आर्थिक सुधारों का विरोधी था। उसके शासन-काल में भुखमरी एवं बेरोजगारी काफी बढ़ गई और जनता में असंतोष व्याप्त होने लगा। फलतः लोगों ने 1848 ई० में क्रांति कर दी।

4. इटली, जर्मनी के एकीकरण में ऑस्ट्रिया की भूमिका क्या थी?

उत्तरः इटली, जर्मनी का एकीकरण ऑस्ट्रिया के साथ संघर्ष के बाद हुआ क्योंकि इटली एवं जर्मनी के प्रांतों पर ऑस्ट्रिया का आधिपत्य तथा हस्तक्षेप था। ऑस्ट्रिया को इटली और जर्मनी से बाहर करके ही दोनों का एकीकरण संभव था। दोनों राष्ट्र ने ऑस्ट्रिया को बाहर निकालने के लिए विदेशी सहायता ली।

5. यूरोप में राष्ट्रवाद के विकास में नेपोलियन बोनापार्ट की क्या भूमिका थी?

उत्तर: 1804 ई० में 1815 ई० तक का काल यूरोप के इतिहास में ‘नेपोलियन युग’ के नाम से जाना जाता है। नेपोलियन विश्व इतिहास का एक महानतम सेनानायक और विजेता था। उसने अनेक युद्धों का सफल संचालन किया और इटली, हॉलैंड, बेल्जियम तथा जर्मनी के बड़े भू-भागों को अपने साम्राज्य में मिलाया और सम्पूर्ण यूरोप को प्रभाव क्षेत्र में ला दिया। नेपोलियन ने फ्रांस के सम्मान को चरम सीमा पर पहुँचाकर राष्ट्रवाद के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया।

6. इटली के एकीकरण के बाधक तत्वों का वर्णन करें।

उत्तरः इटली के एकीकरण में भौगोलिक समस्याएँ सबसे बड़ी बाधक थीं। इसके अलावा कई अन्य समस्याएँ भी थीं जैसे – इटली ऑस्ट्रिया और फ्रांस का विदेशी प्रभुत्व एवं हस्तक्षेप था। ऑस्ट्रिया इटली की स्वतंत्रता का प्रमुख शत्रु था। रोम का राज्य इटली के मध्य में स्थित था जहाँ पोप का प्रभाव था। पोप चाहता था कि इटली का एकीकरण पोप के नेतृत्व में, धार्मिक दृष्टिकोण के आधार पर हो न कि शासकों के नेतृत्व में। राजनीतिक विषमताएँ आर्थिक कारणों से और भी उग्र हो गईं, क्योंकि दक्षिणी इटली अविकसित और ग्रामीण था तथा उत्तरी इटली अर्द्ध-औद्योगिक ।

7. फ्रांस की जुलाई, 1830 की क्रांति का फ्रांस की शासन व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तरः चार्ल्स-X के प्रतिक्रियावादी शासन का अंत हो गया। बूर्बो वंश के स्थान पर ऑर्लियंस वंश को सत्ता सौंप दी गयी। इस वंश के शासक ने उदारवादियों तथा पत्रकारों के समर्थन में सत्ता हासिल की। अतः उसने उदारवादी नीतियाँ अपनायीं।

8. जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का संक्षिप्त विवरण दें।

उत्तरः प्रशा का चांसलर बनने के बाद बिस्मार्क का मुख्य उद्देश्य प्रशा को शक्तिशाली बनाकर जर्मनी संघ में ऑस्ट्रिया के प्रभाव को समाप्त कर प्रशा के नेतृत्व में जर्मनी के एकीकरण के सपने को साकार करना था। अपने इन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए बिस्मार्क को अनेक आंतरिक तथा बाह्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। प्रशा को सेना को पुनर्गठित हेतु अध्यक्ष को जुटाने के क्रम में उसे प्रतिनिधि सभा से काफी संघर्ष करना पड़ा।

9. जर्मनी के एकीकरण में बाधक तत्वों को बताएं।

उत्तरः जर्मनी के एकीकरण में कई बाधाएँ थीं जिसमें मुख्य रूप से निम्न को शामिल किया जा सकता है— ऑस्ट्रिया का प्रतिक्रियावादी शासन, जर्मनी की पिछड़ी हुई राजनीतिक व्यवस्था, राजनीतिक दलों में एकता का अभाव, जर्मन राज्यों की आपसी प्रतिस्पर्धा तथा ऑस्ट्रिया एवं प्रशा की आपसी प्रतिद्वंद्विता ।

10. गैरीबाल्डी के कार्यों का वर्णन करें।

उत्तरः गैरीबाल्डी ने अपने कर्मचारियों तथा स्वयं सेवकों की सशस्त्र सेना बनाई। उसने अपने सैनिकों को लेकर इटली के प्रांत सिसली तथा नेपल्स पर आक्रमण किया। इन रियासतों की अधिकांश जनता बूर्बो राजवंश के निरंकुश शासन से तंग होकर गैरीबाल्डी की समर्थक बन गयी। गैरीबाल्डी ने यहाँ गणतंत्र की स्थापना की तथा विक्टर इमैनुएल के प्रतिनिधि के रूप में वहाँ की सत्ता संभाली। दक्षिणी इटली से जीते गए क्षेत्रों को बिना किसी संघर्ष के गैरीबाल्डी ने विक्टर इमैनुएल को सौंप दिया। वह एक महान देशभक्त था तथा उसने अपना जीवन इटली की प्रगति और एकता के लिए समर्पित कर दिया। इटली के एकीकरण में गैरीबाल्डी का महत्वपूर्ण योगदान था।

11. विलियम । के बाद जर्मनी का एकीकरण बिस्मार्क के लिए असंभव कैसे था?

उत्तरः विलियम । जानता था कि जर्मनी के एकीकरण के मार्ग में ऑस्ट्रिया बाधक है तथा इसे हटाये बिना जर्मनी का एकीकरण संभव नहीं है। अतः ऑस्ट्रिया से मुक्ति पाने के लिए उसे युद्ध में उलझना जरूरी था। इसके लिए उसने जर्मन राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए एक ठोस योजना बनाई। उदारवादियों के विरोध के बाद भी विलियम ने सैन्य बजट पर अधिक खर्च किया। विलियम की इस नीति के कारण बिस्मार्क ने ‘रक्त एवं लौह’ को नीति का अवलम्बन किया तथा जर्मनी का एकीकरण संभव हुआ।

12. पूंजीवाद क्या है?

उत्तरः पूंजीवाद एक आर्थिक व्यवस्था है जिसमें उत्पादन का लक्ष्य अधिक मुनाफा कमाना होता है। उत्पादन के साधनों पर व्यक्ति विशेष का कब्जा होता है, जिसके कारण वर्ग-संघर्ष की स्थिति बनी रहती है।

13. खूनी रविवार क्या है?

उत्तर: अब 9 फरवरी, 1905 को रूस की भूखी जनता ‘रोटी दो’ के नारे के साथ सेट पीटर्सबर्ग स्थित महल की ओर बढ़ रही थी तो जार की सेना ने उनपर गोलियाँ बरसाईं। हजारों लोग मारे गए। उस दिन रविवार का दिन था, अतः इसे खूनी रविवार कहते हैं।

14. रूसी क्रांति के किन्हीं चार कारणों का वर्णन करें।

उत्तरः क्रांति एक छोटे या अचानक अंतराल में घटित घटना नहीं होती, अपितु इसके पीछे लम्बे समय से चले आ रहे कुछ आधारभूत मौलिक कारण होते हैं। रूसी क्रांति के मुख्य कारण थे-

(i) रूस के शासक

(ii) औद्योगिक दौड़ में रूस यूरोप के प्रमुख राज्यों

15. साम्यवाद एक नई आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था कैसे थी?

उत्तरः मजदूरों को पूंजीपतियों के शोषण से मुक्त करना, उत्पादन एवं वितरण में समानता स्थापित करना, मजदूरों को विशेष सुविधाएँ जैसे—कार्य के घंटे, वेतन, मजदूरों को संघ बनाने की सुविधाएँ तथा मजदूरों की न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति करना। सामाजिक व्यवस्था में वर्ग-संघर्ष को समाप्त कर वर्गहीन समाज की स्थापना करना।

16. नई आर्थिक नीति मार्क्सवादी सिद्धान्तों के बीच समझौता था, कैसे?

उत्तरः लेनिन एक कुशल सामाजिक चिंतक तथा व्यवहारिक राजनीतिज्ञ था। उसने यह स्पष्ट देखा कि तत्काल पूरी तरह समाजवादी व्यवस्था लागू करना या एक साथ सारी पूंजीवादी दुनिया से टकराना संभव नहीं है जैसा कि ट्रॉटस्की चाहता था।

17. प्रथम विश्वयुद्ध में रूस की पराजय ने क्रांति हेतु मार्ग प्रशस्त किया कैसे?

उत्तरः प्रथम विश्वयुद्ध 1914 से 1918 तक चला। रूस इस युद्ध में मित्र राष्ट्रों की ओर से लड़ा। युद्ध में शामिल होने का एकमात्र उद्देश्य था कि रूसी जनता आंतरिक असंतोष को भूलकर रूसी मामलों में उलझे रहे, परन्तु युद्ध में रूसी सेना चारों तरफ हार रही थी। सैनिकों के पास न तो अच्छे हथियार थे और न ही पर्याप्त भोजन की सुविधा थी। युद्ध के मध्य में जार ने सेना की कमान अपने हाथ में ले लिया। फलस्वरूप दरबार षड्यंत्रों से घिर गया। जार की अनुपस्थिति में जेरिना और उसका तथाकथित गुरु रासपुटिन (पादरी) जैसा निकृष्ट व्यक्ति राष्ट्रकार्य करने का मौका मिला तथा जिसके कारण राजतंत्र की प्रतिष्ठा धूमिल हुई।

18. अक्टूबर क्रांति क्या है?

उत्तरः लेनिन ने बल प्रयोग द्वारा केरेन्स्की सरकार को पलट देने का निश्चय किया। सेना और जनता दोनों ने साथ दिया। 7 नवम्बर, 1917 ई० को बोल्शेविकों ने पेट्रोग्राड के रेलवे स्टेशन, बैंक, डाकघर, टेलीफोन केन्द्र, कचहरी, अन्य सरकारी भवनों पर अधिकार कर लिया। केरेन्स्की रूस छोड़कर भाग गया। इस प्रकार रूस को महान नवंबर, जिसे अक्टूबर क्रांति भी कहते हैं। अब शासन की बागडोर लेनिन के हाथों में आ गई।

19. साम्राज्यवाद किसे कहते हैं?

उत्तरः जब कोई शक्तिशाली राष्ट्र किसी कमजोर राष्ट्र पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आधिपत्य कर लेता है, साम्राज्यवाद कहलाता है और वह कमजोर राष्ट्र उस शक्तिशाली राष्ट्र का उपनिवेश कहलाता है। दूसरे अर्थ में जब कोई शक्तिशाली राष्ट्र किसी कमजोर राष्ट्र के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं को आशिंक या पूर्ण रूप से प्रभावित करता है, साम्राज्यवाद कहलाता है।

20. सर्वहारा वर्ग किसे कहते हैं?

उत्तर: सर्वहारा का वैसा वर्ग जिसके अंतर्गत किसान, मजदूर तथा आम गरीब लोग शामिल हों, सर्वहारा वर्ग कहलाता है।

21. शीतयुद्ध से आपका क्या अभिप्राय है?

उत्तरः द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात पूंजीवादी राष्ट्र अमेरिका एवं साम्यवादी राष्ट्र रूस के बीच प्रत्यक्ष रूप से युद्ध न होकर एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते थे। प्रत्यक्ष युद्ध कभी भी हो सकता था।

22. होआ-होआ आंदोलन क्या था?

उत्तरः होआ-होआ एक धार्मिक क्रांतिकारी आंदोलन था जिसकी शुरुआत 1939 में हुई तथा इसके नेता हुइन्ह-फू-सो थे।

23. हिन्द-चीन में फ्रांसीसी प्रसार का वर्णन करें।

उत्तरः फ्रांसीसी कम्पनी हिन्द-चीन में प्रसार करने में सक्रिय था। फ्रांसीसी व्यापारियों के साथ-साथ पादरी भी इस क्षेत्र में आने लगा। 1747 ई० के बाद फ्रांस अनाम में रूचि लेने लगा, किन्तु अभी भी इस क्षेत्र में उसकी पकड़ कमजोर थी। उन्नीसवीं सदी में इस क्षेत्र में फ्रांसीसी पादरियों की बढ़ती गतिविधियों के विरुद्ध उग्र आंदोलन प्रारम्भ हो गया। इससे फ्रांस को अपने सैन्य शक्ति के प्रयोग का बहाना मिला। उसने सैन्यबल के आधार पर 1862 ई० में अनाम को संधि के लिए बाध्य किया। इसी प्रकार 1963 ई० में कम्बोडिया पर तथा 1833 ई० में लाओस पर अधिकार कर लिया। अतः बीसवीं सदी की शुरुआत तक सम्पूर्ण हिन्द-चीन क्षेत्र फ्रांस के नियंत्रण में आ गया।

24. हिन्द-चीन का अर्थ क्या है?

उत्तरः हिन्द-चीन के अंतर्गत आज के वियतनाम, लाओस और कम्बोडिया के क्षेत्र आते हैं। इनकी उत्तरी सीमा स्यामार एवं चीन को छूती है, तो दक्षिण में चीन सागर है और पश्चिम में स्यामार क्षेत्र पड़ते हैं।

25. हो-ची-मिन्ह की राजनीतिक उपलब्धियों का वर्णन करें।

उत्तरः हो-ची-मिन्ह वियतनाम में साम्यवादी विचारधारा का प्रचारक-प्रसारक था। 1925 ई० में उसने वियतनाम क्रांतिकारी दल का गठन किया तथा फ्रांसीसी साम्राज्यवाद से लोहा लेने के लिए क्रांतिकारियों के लिए सैनिक प्रशिक्षण की व्यवस्था की। 1930 ई० में राष्ट्रवादी गुटों को इकट्ठा करके कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की जिसे वियतनाम कांग्रेस के नाम से जाना गया। विश्वव्यापी आर्थिक मंदी से देश को उबारने का काफी प्रयास किया। द्वितीय विश्वयुद्ध में जापानी सेना की पराजय पर 2 सितम्बर, 1945 ई० को उत्तरी वियतनाम को स्वतंत्र घोषित किया तथा डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ वियतनाम की स्थापना की।

26. जेनेवा समझौता कब और किनके बीच हुआ?

उत्तर: जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में एक समझौता मई 1954 में फ्रांस, कम्बोडिया, लाओस एवं वियतनाम के मध्य एंग्लो-इंडो में युद्ध की समाप्ति तथा फ्रांसीसी सेना को हटाने के लिए हुआ, जिसे जेनेवा समझौते के नाम से जाना जाता है। इस समझौते के द्वारा लाओस और कम्बोडिया को स्वतंत्रता प्राप्त हुई।

27. माई ली गाँव की घटना क्या थी? इसका क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तरः माई ली गाँव की घटना दक्षिणी वियतनाम में 16 मार्च, 1968 को हुई थी। इस व्यापक जनसंहार में अमेरिकी सेना की एक टुकड़ी ने 300-400 निहत्थे नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया था, जिनमें अधिकांशतः महिलाएँ, बच्चे और वृद्ध लोग थे। वियतनाम युद्ध के दौरान दक्षिणी वियतनाम में माई या सोन तिन्ह जिले में हुए इस नरसंहार में अमेरिकी सेना ने निहत्थे लोगों को मारा, पीटा तथा यौन-उत्पीड़न किया।

28. हिन्द-चीन में फ्रांसीसियों द्वारा उपनिवेश स्थापना के किन्हीं तीन उद्देश्यों का उल्लेख करें।

उत्तरः हिन्द-चीन में फ्रांसीसियों द्वारा उपनिवेश स्थापित करने के तीन उद्देश्य इस प्रकार थे-

1. हिन्द एवं ब्रिटिश कम्पनियों को व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को कम करना।

2. औद्योगीकरण हेतु कच्चे माल प्राप्त करने के लिए।

3. विस्तृत बाजार में अपने द्वारा उत्पादित सामान को बेचने के लिए।

29. हो-ची-मिन्ह के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।

उत्तरः वियतनाम में राष्ट्रवाद के विकास में हो-ची-मिन्ह का अभूतपूर्व योगदान है। वे छात्र-जीवन से ही साम्यवादी विचारधारा से परिचित थे। अतः 1917 ई० में पेरिस में साम्यवादियों का एक गुट बनाया। 1925 ई० में ‘वियतनामी क्रांति दल’ का गठन किया तथा 1930 ई० में वियतनाम के बिखरे राष्ट्रवादी गुटों को एकजुट कर ‘वियतनाम-कांग-सान-डैंग’ (वियतनाम कम्युनिस्ट पार्टी) की स्थापना की। ये राजनीति में उग्र विचारधारा के समर्थक थे। अततः जब 1954 ई० में जेनेवा समझौते के तहत वियतनाम को बाँट दिया गया तो उत्तरी वियतनाम में हो-ची-मिन्ह की सरकार बनी।

30. हो-ची-मिन्ह मार्ग के बारे में वर्णन करें।

उत्तरः हो-ची-मिन्ह मार्ग हनोई से चलकर लाओस, कम्बोडिया के सीमा क्षेत्र से गुजरता हुआ दक्षिणी वियतनाम तक जाता था जिसमें कच्ची-पक्की सड़कें निकटकर जुड़ी हुई थीं। अमेरिकी बमों द्वारा उसे क्षतिग्रस्त कर दिया जाता था किन्तु वियतनामी उसे तुरंत मरम्मत कर लेते थे। इस मार्ग पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से अमेरिका ने लाओस, कम्बोडिया पर आक्रमण कर दिया था परंतु तीन तरफा संघर्ष में फँसकर उसे वापस होना पड़ा था।

31. रॉलेट एक्ट से आप क्या समझते हैं?

उत्तरः बढ़ती हुई क्रांतिकारी घटनाओं एवं असंतोष को दबाने के लिए लॉर्ड चेम्सफोर्ड न्यायाधीश सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता में एक समिति की नियुक्ति की। समिति की अनुशंसा पर 25 मार्च, 1919 ई० को रॉलेट एक्ट पारित हुआ। इसके अन्तर्गत एक विशेष न्यायालय के गठन का प्रावधान था जिसके निर्णय के विरुद्ध कोई अपील नहीं की जा सकती थी। किसी भी व्यक्ति को अमान्य साक्ष्य और बिना वारंट के भी गिरफ्तार किया जा सकता था।

32. दांडी यात्रा का क्या उद्देश्य था?

उत्तरः दांडी यात्रा का उद्देश्य नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा आंदोलन को प्रारम्भ करना था। गाँधीजी इस यात्रा के द्वारा सविनय अवज्ञा आंदोलन को देशव्यापी बनाना चाहते थे।

33. गाँधी इरविन पैक्ट अथवा दिल्ली समझौता क्या था?

उत्तरः सविनय अवज्ञा आंदोलन की व्यापकता ने अंग्रेजी सरकार को समझौता करने के लिए बाध्य किया। सरकार को गाँधी के साथ समझौता करना पड़ा, जिसे गाँधी इरविन पैक्ट दिल्ली समझौता के नाम से जाना जाता है। जो 5 मार्च, 1931 को गाँधीजी एवं लॉर्ड इरविन के बीच सम्पन्न हुआ था। इसके तहत गाँधीजी ने आंदोलन को स्थगित कर दिया। वे द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने हेतु सहमत हो गए।

34. चंपारण आंदोलन कब हुआ तथा इसके क्या कारण थे?

उत्तरः चंपारण आंदोलन अप्रैल 1917 ई० में बिहार के चंपारण जिले में हुआ था। बिहार में नीलहे गोरों द्वारा तीनकठिया व्यवस्था प्रचलित थी जिसमें किसान को अपनी भूमि के 3/20 हिस्से में नील की खेती करनी होती थी। किसान नील की खेती नहीं करना चाहते थे क्योंकि इससे भूमि की उर्वरता कम हो जाती थी। उसे उत्पादन का उचित कीमत भी नहीं मिलता था जिससे उसकी स्थिति दयनीय हो गयी थी। नए किसानों के पक्ष को लेकर महात्मा गाँधी ने चंपारण में सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की। ब्रिटिश सरकार को अन्ततः झुकना पड़ा।

35. जतरा भगत के बारे में आप क्या जानते हैं?

उत्तर: अंग्रेजों के खिलाफ आदिवासियों (छोटानागपुर क्षेत्र के उराँव) ने 1914 ई० से 1918 ई० के बीच विद्रोह किया जिसका नेता जतरा भगत था। इस आंदोलन में सामाजिक एवं शैक्षणिक सुधार पर विशेष बल दिया गया, जिसमें परमेश्वरनाथ पर बल तथा मांस, मदिरा और आदिवासी नृत्यों से दूर रहने की बात की गई।

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निष्कर्ष (Calculation)

Bihar Board Class 10th Social Science VVI Subjective Question 2027 की तैयारी करते समय History, Geography, Political Science और Economics चारों विषयों पर समान ध्यान दें। महत्वपूर्ण प्रश्नों की सूची बनाकर उनका लिखित अभ्यास करें और साथ ही पूरे पाठ्यक्रम की तैयारी करते रहें।

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